“अनुशासन ही अपने जीवन के उद्देश्य और उपलब्धि के बीच का सेतु है।”

अनुशासन अर्थात् अनुशास्यते नैन। इसका अर्थ है – स्वयं का स्वयं पर शासन। ‘अनुशासन’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। अनु+शासन यानि अपने ऊपर स्वयं शासन करना तथा शासन के अनुसार अपने जीवन को चलाना ही अनुशासन है। जो इंसान अनुशासन में नहीं रह सकता वह अपने जीवन का निर्माण कभी नहीं कर सकता। अनुशासनप्रिय होने के लिए हमें स्वप्रेरणा के आधार पर कार्य करना होगा। इसी संदर्भ में हमारे नवम् आचार्य श्री तुलसी जी फरमाते थे “ निज पर शासन, फिर अनुशासन।”

सफलता की कुंजी अनुशासन:- अनुशासन हमारे जीवन की सफलता की कुंजी है। जीवन के हर कार्य, हर परिस्थिति, हर मोड़, हर क्षेत्र में अनुशासन का बहुत बड़ा महत्त्व होता है। अगर हम आगे बढ़ना चाहते है और अपनी मंजिल को पाना चाहते है तो हमें अनुशासन में जीवन-यापन करना होगा, तभी हम स्वयं के लिए सुखद और उज्जवल भविष्य की राह निर्धारित कर पायेगें और सफलता की सीढ़ी चढ़ पायेंगें। बिना अनुशासन के कोई भी कार्य किया जाता है तो हम स्वयं के लिए कठिनाईयों की खाई खोद डालते है। जरा सोचिये क्या अनुशासन के बगैर एक एथलीट दौड़ की प्रतियोगिता को जीत सकता है? क्या एक कप्तान जहाज को सही ढंग से चला सकता है? क्या एक वायलिन वादक किसी संगीत समारोह में अच्छी तरह से वायलिन बजा सकता है? क्या कोई भी सामाजिक संस्था, बिजनेस सही तरिके से चला सकता है? क्या कोई गृहणी घर को संभाल सकती है? क्या कोई भी विद्यार्थी सही ढ़ग से शिक्षा प्राप्त कर सकता है? बिल्कुल नहीं। कहने का तात्पर्य यह है कि काम चाहे आसान हो या मुश्किल, व्यक्तिगत हो या सेवा संबंधी, अनुशासन के बगैर उसका सफल संचालन नामुमकिन है। 

शॉर्ट कट नहीं मेहनत का नाम है अनुशासन:- व्यक्ति का स्वभाव ही ऐसा होता है कि वह नतीजे की परवाह किए बिना ही अपनी इच्छा के अनुसार काम करना पसंद करता है और नियमानुसार काम करने की बजाय शॉर्ट कट तरीका अपनाता है या गलत ढंग से सफलता प्राप्त करने की कोशिश करता है। अनुशासन रहित ऐसा प्रयास हो सकता है कि व्यक्ति को क्षणिक सफलता दिला दे, पर आखिरकार इससे नाकामी ही हासिल होती है।

अनुशासन का मतलब है, किसी काम को सही तरीके से संपादित करना। ऐसा करने में हमें अतिरिक्त मेहनत करने की जरूरत पड़ सकती है, पर यह भी सच है कि मंजिल तक पहुंचने का यही एक रास्ता है। जो अनुशासित रहते हुए अपने काम में अथक परिश्रम करते हैं, सफलता उनको ही नसीब होती है। अनुशासन का पालन करना आपके लिए कई बार कष्टप्रद, परेशानी और चुनौतिपुर्ण हो सकता है, पर अंततः वह आपको सफलता की ओर ही ले जाता है और साथ ही साथ मान सम्मान बढ़ाता है और दुसरों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन जाते है। इसलिए हर काम में अनुशासन जरूरी है। तभी काम को पूरा करने का दृढ़ संकल्प भी हमारे मन में बना रहता है। अनुशासन व्यक्ति, समाज और देश सबके के लिए बेहद जरूरी है।

प्रकृति सिखाती सच्चा अनुशासन:-  अनुशासन की सच्ची शिक्षा हम कुदरत से ले सकते हैं सूर्य और चन्द्रमा समय पर निकलते हैं और समय पर ही डूबते हैं समय पर ही ऋतुएं आती हैं।  जीव-जन्तु भी इसी अनुशासन का पालन करते हुए दिखाई देते हैं । पेड-पौधों में भी यही अनुशासन व्याप्त रहता है। घड़ी की सुई भी अनुशासन का पालन करते हुए चलती है। ये सब हमें अनुशासन की ही शिक्षा देते हैं। यदि प्रकृति अपना अनुशासन तोड़ दें तो हमारी पृथ्वी जीने लायक नहीं रहेगी।

अनुशासन का दूसरा नाम जीवन:- अनुशासन वो पुल है जो हमें सफलता के रास्ते पर ले जाता है। यह एक ऐसी कड़वी दवा है, जिसका सामना करके ही हम कामयाब बन सकते हैं। यह वो डोर होती है जो हमें आकाश की बुलंदियों को छूने में मदद करती है। जैसे डोर के बिना पतंग आसमान में उड़ नहीं सकती, वैसे ही इसके बिना हम कभी सफल नहीं हो सकते हैं।

अनुशासन दो तरह का होता है पहला बाहरी अनुशासन जो व्यक्ति के उपर जबरदस्ती थोपा जाता है। यह भय, शक्ति और सजा पर आधारित होता है और दूसरा आंतरिक अनुशासन जो व्यक्ति के अंदर से जागृत होता है बल्कि उस पर थोपा नहीं जाता। इसमें नियमों का पालन करना बोझ नहीं समझा जाता। इसीलिए अनुशासन का दूसरा नाम ही जीवन कहलाता है।

अनुशासन का अर्थ गुलाम नहीं:- अनुशासन का पालन करने का अर्थ यह नहीं है कि आप नियमों और तौर-तरीकों के गुलाम हो गए या आप किसी के अधीन हो गये या आपकी आजादी छिन गई। यह सोच गलत है। अगर ट्रेन को पटरी से उतार दें, तो वह आजाद हो जाएगी। लेकिन जरा सोचिए, ऐसे में क्या वह चल पाएगी? अगर इंसान खुद ही अपना ट्रैफिक कानून बनाने लगे, तो फिर हमारे देश के ट्रैफिक का क्या हाल होगा, आप इसका सहज ही अनुमान लगा सकते हैं। अनुशासन आजादी में खलल नहीं है, बल्कि नियम-कानून के अनुसार किसी काम को करने की सीख है।

अनुशासन सामाजिक तथा राष्ट्रीय आवश्यकता:- अनुशासन से अभिप्राय नियम, सिद्धान्त तथा आदेशों का पालन करना है। जीवन को आदर्श तरीके से जीने के लिए अनुशासन में रहना आवश्यक है। अनुशासन का अर्थ है, खुद को वश में रखना। अनुशासन राष्ट्रीय जीवन के लिए बेहद जरूरी है। यदि प्रशासन, स्कूल, समाज,परिवार सभी जगह सब लोग अनुशासन में रहेंगे और अपने कर्त्तव्य का पालन करेंगे, अपनी ज़िम्मेदारी समझेंगे तो कहीं किसी प्रकार की गड़बड़ी या अशांति नहीं होगी। नियम तोड़ने से ही अनुशासनहीनता बढ़ती है तथा समाज में अव्यवस्था पैदा होती है। अनुशासन बचपन से ही सिखाया जाता है बड़े होकर अनुशासन सीखना कठिन है। अनुशासन का पाठ बचपन से परिवार में रहकर सीखाया जाए तो आगे चलकर विद्यालय में जाकर अनुशासन की भावना का अच्छा विकास होता है। अच्छी शिक्षा विद्यार्थी को अनुशासन का पालन करना सिखाती है। सच्चा अनुशासन ही मनुष्य को पशु से ऊपर उठाकर वास्तव में मानव बनता है। भय से अनुशासन का पालन करना सच्चा अनुशासन नहीं है और ना ही अनुशासन पराधीनता है। यह सामाजिक तथा राष्ट्रीय आवश्यकता है।

देश में व्याप्त तमाम समस्याओं के निराकरण के लिए देश के प्रत्येक नागरिक को अनुशासनप्रिय होना चाहिए। इसीलिए अपने, परिवार, समाज राष्ट्र के कल्याण के लिए अनुशासन का विशेष महत्व है अनुशासन से ही मनुष्य का पूर्ण विकास संभव है। अत: इससे भागने की बजाय इसका पालन करना सीखें। इसलिए अनुशासित बनें और लक्ष्य पर निगाह रखें, आपको सफल होने से कोई रोक नहीं सकता।

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Bindu Jain Bothra, artist, writer, digital creator/designer, blogger and has a talent of so many field/areas. She has completed her MBA (Specialization in finance) now she is pursuing Jain Scholar (ABTMM Scheme) from Ladhnu. She is a full time leaner and blogger by choice. Her tagline is “Bindu se Sindhu Ki Aur”.  She follows this tagline. She loves to read, write and present in a creative and informative ways. She writes what she do research & experience in the particular subject/field. She always wants to share her creativity, ideas and knowledge world wide. Her imagination and thinking powers make her more stronger and different from others. She always loves to do new things and creates new ideas and platform for herself & for all to enjoy her life to the fullest.

Bindu Jain Bothra

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