चिंता नहीं, चिंतन करें

Author Name – Bindu Jain Bothra 

Categories – Motivational & Inspirational

इसको समझने के लिए हम अपनी बात एक कहानी से शुरू करते है:- एक बोध कथा है! एक गरीब ब्राह्मण था। एक सुबह वो अपने सामान की गठरी अपने सर पर लादे राजपथ से जा रहा था। तभी वहाँ पीछे से राजा का रथ आ गया। राजा ने देखा कि एक बुजुर्ग आदमी बोझ उठाये पैदल चल रहा है। उसने रथ को रोक कर बुजुर्ग ब्राह्मण को रथ पर बैठने के लिए कहा। ब्राह्मण सकुचाया, बोला-नहीं महाराज, मैं पैदल ही ठीक हूँ। राजा ने विनम्रता से कहा, कोई बात नहीं ब्राह्मण देव, मैं भी उसी रस्ते जा रहा हूँ, आपको आपकी मंजिल पर उतार दूंगा, आ जाइये। बड़ी सकुचाहट के साथ वो राजा के रथ पर बैठ गया। थोड़ी देर बाद राजा की उस पर नजर पड़ी तो देखा कि उसने अपनी गठरी को अपने सर पर ही रखा हुआ है।  राजा ने कहा- ब्राह्मण देव, आप अपना ये बोझ क्यों उठाये हुए हैं। इसे नीचे रख दीजिये। वो बोला- नहीं महाराज, आपने मुझ नाचीज इंसान को अपने रथ पर जगह दी, यह ही बहुत है मेरे लिए। अब मैं अपनी गठरी भी नीचे रख कर रथ पर और वजन नहीं बढ़ाना चाहता। राजा मुस्कुराया, बोला- ब्राह्मण देव, आप बिना वजह ही अपने बोझ को उठाने का श्रम कर रहे हैं। आप इसे नीचे रखें या सिर पर, रथ पर तो यह है ही। और आपके सिर पर इसे रखने से रथ के वजन में कोई अंतर नहीं आ रहा। आप बिना वजह ही अपने आप को कष्ट दे रहे हैं। उतार दीजिये इस बोझ को, नीचे रख दीजिये।

दोस्तों, क्या आपको नहीं लगता कि हम भी कुछ उस ब्राह्मण की तरह ही हैं। हम भी हर छोटी से छोटी बात में परेशान हो जाते हैं। दुनिया भर की फ़िक्र, तनाव, डर, चिंता, काम का बोझ और भी पता नहीं क्या क्या अपने ऊपर हावी कर लेते हैं। हमें लगता है कि अगर हम नहीं करेंगे, तो होगा ही नहीं। बड़ी भूल है। सृष्टि की हर चीज उसके नियमो से बंधी है। समय से सूरज निकलता है, समय से पृथ्वी सूरज का चक्कर लगाती है। हर चीज समय अपने नियम से चलती है। जब कोई आर्किटेक किसी मकान का नक्शा बनाता है तो उसे पता रहता है कि कोनसी चीज कहाँ लगानी है। ईंट कहाँ लगेगी, टाइल्स कहाँ लगेगी और झूमर कहाँ लगेगा। हर चीज उसके दिमाग में स्पष्ट होती है। अब ये ईंट, टाइल्स, और झूमर इसी बात का तनाव लेकर बैठ जाएँ कि पता नहीं हमारा कहाँ उपयोग होगा, कहाँ हमें लगाया जाएगा, कब लगाया जाएगा ,हमारा कैसे क्या होगा। इसी सोच में अगर वो डुबे रहे तो ये उनकी बेवकूफी है, है ना? आँख में पड़ा हुआ छोटा सा तिनका भी संसार से बड़ा दिखाई देता है। उसी तरह हमारी छोटी सी परेशानी भी हमें पृथ्वी के वजन से ज्यादा भारी लगती है। रोज के अनगिनत तनाव, चिंताओं का बोझ हम अकारण ही अपने सिर पर लाद लेते हैं। हम में इतना विवेक और समझ तो है कि हम अपनी तथाकथित परेशानियों को अपने ऊपर लादें या उसे फेंक दें। भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है -“कर्ता का अहंकार छोड़, सिर्फ कर्म कर, फल की चिंता मत कर। तेरे किये से ना कुछ हुआ है, और तेरे बिना किये भी दुनिया में बहुत कुछ हो गया है। व्यर्थ ही अपने को तनाव और चिंता में मत रख। कर्म कर, सिर्फ कर्म।“

तनाव एक बोझ है:- अब आप समझ ही गये होंगे कि तनाव और चिंता क्या है? यह एक बोझ है। किसी बात से परेशान, आहत या दुखी होकर, व्यक्ति का मन से गहन उदास होना ही तनाव है। तनाव मन से संबंधित है। तनाव (Stress) एक तरह का द्वंद है जो संतुलन और सामंजस्य न बैठा पाने के कारण होता है। जो व्यक्ति तनाव से ग्रसित होता है उसका मन अशांत हो जाता है, भावनाएं स्थिर नहीं रह पातीं। सही और गलत का फैसला करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में संबंधित व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्थितियां दिन-प्रतिदिन खराब होती जाती हैं।

बच्चों से बुढों तक तनाव से परेशान:- आजकल की इस भागदोड़ भरी जिंदगी में बच्चों से लेकर बुढों तक सभी तनाव से परेशान है। बच्चों को पढ़ाई की चिंता, युवाओं को पैसे और काम की चिंता और बुजुर्गों को बिमारी की चिंता। ऐसे लगता है मानो तनाव/चिंता ने सबको अपना गुलाम बना लिया है। तनाव (Stress) हमारी प्राकृतिक ऊर्जा को समाप्त करता है और एक तरह की मानसिक बीमारी को बढ़ावा देता है जो हमपर काफी खतरनाक तरीके से हावी हो जाती है।

तनाव के प्रकार:- तनाव दो तरह के होते है। पहला – अच्छा तनाव और दुसरा बुरा तनाव। कभी तनाव लेने से व्यक्ति में किसी भी कार्य को बेहतर करने की लगन पैदा हो जाती है और कुछ कर गुजरने तथा मंजिल तक पहुँचने की प्रेरणा, नई उर्जा, उत्साह प्रदान करती है। इस जुनुन से व्यक्ति अपनी मंजिल को पा लेता है। लेकिन स्थिति तब बिगड़ती है जब यह तनाव हावी होने लगता है। वहीं ये अच्छा बुरा बन जाता है। परिवार, पैसा, काम, प्यार, ओफिस, बिजनेस, स्कूल, कॉलेज- ये सब तनाव कारण नहीं, सिर्फ माध्यम या निमित्त बनते है। और यह तनाव के निमित्त तभी बनते है जब इनसे जुड़ी हर बात को हम अपने ऊपर हावी होने देते है। ज्यादा तनाव हमारी सेहत के लिये हानिकरक है इसकी वहज से परिवार और दोस्तों से संबंध भी बिगड़ जाते है। कई बार जब हम लगातार तनाव भरी परिस्थितियों से गुजरते है, तो हमारा गुस्से पर नियंत्रण नहीं रहता और हम अपना ही विनाश कर बैठते है।

नीचे दिए गए तनाव के कुछ लक्षण को पहचाने और समय पर इसका इलाज कर जिंदगी में खुशियां लायें।

तनाव के लक्षण:-

  • सिरदर्द, पीठ दर्द
  • निंद न आना
  • गुस्सा और हताश होना
  • किसी एक चीज पर ध्यान न लगा पाना
  • रोना, उदास रहना
  • दुसरों को नजर अंदाज करना
  • पेट खराब होना या अल्सर होना
  • रेशेज (लाल चकते होना)
  • हाईब्लडप्रेशर, हृदयरोग, स्ट्रॉक

 तनाव से बचने के उपाय:-

  • जल्दी सो जायें, भरपुर नींद लें और सुबह जल्दी उठे,
  • नियमित रूप से 20 से 30 मिनट शारीरिक व्यायाम या प्राणायाम या योगा करें,
  • मेडिटेशन करें,
  • गाना सुने या पुस्तक पढ़ें,
  • आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ काम करें,
  • अपने तनाव के कारणों को या अपनी भावनाओं को कागज पर लिखें,
  • रचनात्मक कार्य करें,
  • प्रसन्न रहें,
  • दिनचर्या में बदलाव,
  • परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताए,
  • ना कहना सीखें (जो जिम्मेदारियां चीजें आप संभाल ना पाए, उन्हें ना बोलना सीखें)।

किसी ने सच ही कहा है कि

जो समय चिंता में गया, समझों कुड़ेदान में गया।
जो समय चिन्तन में गया, समझों तिजोरी में गया।।

सच में हम चिंता/तनाव कर अपना कीमती समय बर्बाद कर लेते है। फिर जब हमें असफलता मिलती है तब हम उसका अफसोस करते है। “अब पछ्ताये होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत” इस कहावत से आप समझ ही गये होंगें कि अपना अमुल्य समय चिंता में युँही बर्बाद करने के बाद हमें पछताने और अफसोस करने से कुछ हासिल नहीं होगा।। इसीलिए हमें यह समझ लेना चाहिए कि किसी भी परिस्थिति में हारकर सिर्फ चिंता/ तनाव करने से कुछ नहीं होगा, इससे हम अपनी जिंदगी में दो कदम पीछे चलें जाते है। जितना समय हम चिंता में लगाते है उतना ही समय अगर हम चिंतन करने में लगाए तो हम हर कठिन परिस्थिति से बाहर निकलकर आ सकते है और हम जिंदगी में कई गुना आगे बढ़ जाते है। इसीलिए चिंता नहीं, चिंतन करो और अब अपनी अंदर की उर्जा व उत्साह को बरकरार रखने के लिए तनाव/चिंता को हमेशा के लिए कहे अलविदा।

Writer – Bindu Jain (Bothra)

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About Author

Bindu Jain Bothra, artist, writer, digital creator/designer, blogger and has a talent of so many field/areas. She has completed her MBA (Specialization in finance) now she is pursuing Jain Scholar (ABTMM Scheme) from Ladhnu. She is a full time leaner and blogger by choice. Her tagline is “Bindu se Sindhu Ki Aur”.  She follows this tagline. She loves to read, write and present in a creative and informative ways. She writes what she do research & experience in the particular subject/field. She always wants to share her creativity, ideas and knowledge world wide. Her imagination and thinking powers make her more stronger and different from others. She always loves to do new things and creates new ideas and platform for herself & for all to enjoy her life to the fullest.

Bindu Jain Bothra

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