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चिंता नहीं, चिंतन करें

जो समय चिंता में गया, समझों कुड़ेदान में गया।
जो समय चिन्तन में गया, समझों तिजोरी में गया।।

सच में हम चिंता/तनाव कर अपना कीमती समय बर्बाद कर लेते है। फिर जब हमें असफलता मिलती है तब हम उसका अफसोस करते है। “अब पछ्ताये होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत” इस कहावत से आप समझ ही गये होंगें कि अपना अमुल्य समय चिंता में युँही बर्बाद करने के बाद हमें पछताने और अफसोस करने से कुछ हासिल नहीं होगा।।

Story-लहर

कहानी -लहर Author Name – Meena Dugar, Kolkata Categories – Story सजा नहीं सम्मान होती है बेटियां, गैरों के बीच अपनी होती है बेटियां। शीला अपनी बेटी के होने वाले बच्चे के लिए स्वेटर बुन रही थी। भविष्य के सपनों को संजोते संजोते अचानक वह अतीत की उधेड़बुन में लग गई। पुरानी यादें ताजा होने …

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